छोटे अधिकारी बिना समझे मनमाने ढंग से आचार संहिता का दुरूपयोग कर रहे हैं : गोविंद गोयल
खाना-तलाशी के नाम पर आमजन की प्रताड़ना बंद की जाये: गोविंद गोयल
भोपाल । प्रदेश कांगे्रस के कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल ने आज मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने करीब 20 मिनट तक वी. एल. कांताराव से जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने और आम लोगों की समस्याओं के निराकरण के संबंध मंे चर्चा की। उन्होंने कहा कि छोटे अधिकारी बिना समझे मनमाने ढंग से आचार संहिता का दुरूपयोग कर रहे हैं। खाना तलाशी के नाम पर आम जनता को परेशान कर रहे हैं। छोटे-छोटे व्यापारी और आम आदमी जो हर शहरों में आसपास के छोटे नगरों से बड़े शहरों में खरीद-फरोख्त करने आते हैं वे एक-दो लाख रूपये नगद लेकर ही चलते हैं। उनका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं होता है। अतएव चुनाव आयोग को इस संबंध में संज्ञान लेना चाहिए कि व्यापारिक उद्देश्य से निकले छोटे-छोटे दुकानदारों से निर्वाचन नियमों की आड़ में अवैध वसूली न की जाये।

श्री गोयल ने जनहित की बात रखते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को घ्यान दिलाया कि आचार संहिता के दौरान कोई भी व्यक्ति अपने नेता का फोटो या झंडा अपने घर पर नहीं लगा पा रहा है। धार्मिक संस्थाओं द्वारा आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों, यज्ञ, भजन, भंडारा आदि के लिए निर्वाचन आयोग से परमीशन लेना पड़ती है? स्कूल जाने वाले बच्चों की बस, वेन, एम्बुलेंस के वाहन चालक, दुकानदार, छोटा व्यापारी भी इन अधिकारियों द्वारा बनायी गई व्यवस्थाओं से प्रताड़ित महसूस करते हैं। इन्हंे तलाशी के नाम पर परेशान न किया जाये। चुनाव आयोग से इसके स्पष्ट निर्देश देने का उन्होंने आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि शादी-व्याह का मौसम है, लगुन के समय कई माता-पिता, व्यापारी सस्ते के चक्कर में शहरों में थोक खरीदी के लिए आते हैं, उन्हें परेशान नहीं किया जाना चाहिए। तलाशी के दौरान की जा रही जांच में यह पता लगाया जाये कि क्या यह राशि वास्तव में खरीद फरोक्त के लिए लायी गई है अथवा किसी चुनावी एजेंडे के तहत।

श्री गोयल ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि शासकीय एवं प्रशासकीय अधिकारियों को आचार संहिता के नियमों की पूरी जानकारी से अवगत कराया जाये, छोटे अधिकारियों द्वारा आचार संहिता के दौरान बिना समझे मनमाने ढंग से किये जा रहे दुरूपयोग को रोका जाये। जनहित को ध्यान में रखते हुए शासकीय एवं प्रशासकीय अधिकारियों द्वारा प्रचार-प्रसार के माध्यम से आचार संहिता की पूरी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जाये, ताकि आचार संहिता के चलते आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानियों का सामना ना करना पड़े और वह तनाव मुक्त रहकर अपना कार्य कर सकें।

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