नई दिल्ली : नागर विमानन प्राधिकार की स्थापना को लगभग खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री अशोक गजपति राजू ने आज कहा कि उन्हें नियामक का सिर्फ नाम बदलने की कोई जरूरत नहीं दिखती।

संप्रग सरकार ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की जगह नागर विमानन प्राधिकार (सीसीए) बनाने का प्रस्ताव किया था जिसे पूरी परिचालनत्मक और वित्तीय स्वायत्तता देने का प्रावधान था ताकि नियामक को अधिकार हों।

नागर विमानन मंत्री ने कहा, ‘सीएए की जरूरत क्या है? सिर्फ नाम बदलने से कौन सा उद्देश्य पूरा होगा? मुझे डीजीसीए की जगह नयी संस्था की जरूरत नहीं दिखती।’ राजू ने हालांकि स्वीकार किया कि डीजीसीए के काम-काज में ‘अपारदर्शिता’ है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा के हित में संस्था में और पारदर्शिता लाई जाएगी।

मंत्री ने कहा कि डीजीसीए को ज्यादा उत्तरदायी और अर्थपूर्ण संस्था बनाने की उल्लेखनीय योजना तैयार की जा रही है जिसके संप्रग सरकार के दौरान सुरक्षा के आधार पर कई ‘पदावन्नति’ का सामना करना पड़ा था। डीजीसीए 18 प्रमुख सेवाओं को पूरी तरह आनलाइन बनाने का प्रयास कर रहा है जिनमें ई-जीसीए (नागर विमानन में ई-गवर्नेंस) परियोजना के अंग के तौर पर इस महीने पायलटों को लाइसेंस प्रदान करन व सुरक्षा प्रक्रिया में मंजूरी शामिल है।

राजू ने कहा, ‘डीजीसीए में और पारदर्शिता की जरूरत है। चीजों को और पारदर्शी होना चाहिए और अपारदर्शिता को खत्म करना होगा ताकि व्यवस्था ज्यादा जिम्मेदार और कामकाजी बने।’ उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जबकि विश्व भर में विशेष तौर पर ब्रसेल्स हवाईअड्डे पर मार्च में हुए आतंकी हमलों के बाद विमानन सुरक्षा को खतरा बढा है।

घरेलू विमानन कंपनियों में सुरक्षा में चूक के मद्देनजर डीजीसीए की प्रभावशालीता के बारे में बढ़ती चिंता के मद्देनजर राजू ने कहा कि सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है और सरकार इसकी उपेक्षा नहीं कर सकती। राजू ने कहा, ‘पिछली सरकार के दौरान डीजीसीए की साख घटी थी। मौजूदा सरकार में इसका उन्नयन हुआ। हम इसे अर्थपूर्ण नियामक बनाना चाहते हैं।’ अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन ने जनवरी 2014 में भारत की विमानन सुरक्षा की रेटिंग घटाई थी और पिछले साल अप्रैल में इसका उन्नयन किया था।

राजू ने कहा कि सरकार के लिए विमानन सुरक्षा में सुधार ध्यान का मुख्य केंद्र है। नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार कर रहा है। मंत्री ने कहा, ‘सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए और यह निरंतर प्रक्रिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि नियामाकों उद्देश्यपूर्ण होना होगा और लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘कुछ नियमों के शायद बदलाव करने की जरूरत है और बहुत सा काम चल रहा है।’

मंत्री ने कहा कि किसी ‘सुरक्षा फार्मेट’ के आधार पर बीसीएएस विभिन्न सुरक्षा विशेषताओं को उन्नयन कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘ब्यूरो हवाई अड्डों के वर्गीकरण के आधार पर लेखा-परीक्षण करेगा। हम चाहेंगे कि वे बिना किसी हस्तक्षेप के काम करें ताकि भारतीय वायुमार्ग सुरक्षित रहें।’

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