नई दिल्ली। स्‍वच्‍छ भारत मिशन की प्रमुख परियोजना ‘स्‍वच्‍छ आइकॉनिक स्‍थल (एसआईपी) के तीसरे चरण के तहत दस नए महत्‍वपूर्ण दर्श‍नीय (आइकॉनिक) स्‍थलों पर कार्य प्रारंभ किया गया है। इन दस नए आइकॉनिक स्‍थलों में राघवेंद्र स्वामी मंदिर (कुरनूल, आंध्र प्रदेश); हजारद्वारी पैलेस (मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल); ब्रह्मा सरोवर मंदिर (कुरुक्षेत्र, हरियाणा); विदुर कुटी (बिजनौर, उत्तर प्रदेश); माणा गांव (चमोली, उत्तराखंड); पैंगांग झील (लेह-लद्दाख, जम्मू-कश्मीर); नागवासुकी मंदिर (इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश); इमा कैथल/मार्केट (इम्फाल, मणिपुर); सबरीमाला मंदिर (केरल); और कण्‍वाश्रम (उत्तराखंड) शामिल हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित यह परियोजना राज्‍य सरकारों और स्‍थानीय प्रशासन के सहयोग से पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय द्वारा समन्वित या संचालित की जा रही है। इन नए स्‍थलों को आवश्‍यक सहयोग या सहायता प्रदान करने के लिए सीएसआर (कॉरपोरेट सामाजिक दायित्‍व) भागीदारों के रूप में सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू)/कंपनियों के चयन को अंतिम रूप देने के लिए सलाह-मशविरा फिलहाल जारी है। ये नए स्‍थल अब चरण I और चरण II के तहत चयनित किए गए उन 20 आइकॉनिक स्‍थलों में सम्मिलित हो गए हैं जहां विशेष स्‍वच्‍छता या साफ-सफाई के कार्य पहले से ही जारी हैं।

वर्ष 2016 में लांच किए गए चरण I के तहत चयनित किए गए आइकॉनिक स्‍थल ये हैं: अजमेर शरीफ दरगाह, सीएसटी मुंबई, स्वर्ण मंदिर, कामाख्या मंदिर, मणिकर्णिका घाट, मीनाक्षी मंदिर, श्री माता वैष्णो देवी, श्री जगन्नाथ मंदिर, ताजमहल और तिरुपति मंदिर।

स्‍वच्‍छ आइकॉनिक स्‍थलों के चरण II का शुभारंभ नवंबर, 2017 में किया गया था और इनमें गंगोत्री, यमुनोत्री, महाकालेश्वर मंदिर, चारमीनार, कॉन्वेंट एंड चर्च ऑफ सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी, कलादी, गोमेतेश्वर, बैद्यनाथ धाम, गया तीर्थ और सोमनाथ मंदिर शामिल हैं।

एसआईपी इन तीन अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के साथ एक सहयोगात्‍मक परियोजना है: आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय, संस्‍कृति मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय। इसमें संबंधित राज्‍यों के स्‍थानीय प्रशासन शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें प्रायोजक भागीदारों के रूप में सार्वजनिक क्षेत्र और निजी कंपनियां भी शामिल हैं।

एसआईपी के तीसरे चरण का शुभारंभ आज माणा गांव में किया गया जो उत्तराखंड में बद्रीनाथ मंदिर के निकट अवस्‍थि‍त है। यह गांव अब एक स्‍वच्‍छ आइकॉनिक स्‍थल बन गया है। इस गांव में पौराणिक महत्‍व के अनेक स्‍थल हैं, इसलिए वहां बड़ी संख्‍या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं।

इस शुभारंभ अवसर पर पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय में सचिव श्री परमेश्‍वरन अय्यर ने कहा कि चरण I के आइकॉनिक अथवा दर्शनीय स्‍थलों पर अनेक उल्‍लेखनीय पहल की गई हैं जिनमें बेहतर सीवेज बुनियादी ढांचा, जल निकासी सुविधाएं, सीवेज शोधन संयत्र (एसटीपी) की स्‍थापना करना , बेहतर स्‍वच्‍छता सुविधाएं, वाटर वेंडिंग मशीनें (वाटर एटीएम) लगाना, ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन (एसएलडब्‍ल्‍यूएम) इकाई की स्‍था‍पना करना, संरचना की पुनर्स्थापना, सड़कों का रखरखाव, प्रकाश व्यवस्था, पार्कों का सौंदर्यीकरण, प्रमुख स्‍थलों के अलावा उपागमन और पहुंच क्षेत्रों में बेहतर परिवहन सुविधाओं की स्‍थापना करना शामिल हैं। उन्‍होंने कहा कि चरण I और चरण II के आइकॉनिक स्‍थलों की वार्षिक समीक्षा हैदराबाद के ऐतिहासिक स्‍थल चारमीनार में इस माह के उत्तरार्द्ध में की जाएगी, ताकि इस दिशा में अब तक हुई प्रगति का आकलन किया जा सके।

उन्‍होंने 26.87 लाख रुपये की स्‍वीकृत राशि के साथ माणा गांव में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन से जुड़ी चार प्रमुख गतिविधियों की भी शुरुआत की जिनमें सामुदायिक सोख गड्ढे एवं खाद (कम्‍पोस्‍ट) के गड्ढे तैयार करना, जैव एवं कार्बनिक एवं अकार्बनिक अपशिष्‍ट को अलग-अलग करने वाले केन्‍द्र की स्‍थापना करना और तरल अपशिष्‍ट के लिए नालियां बनाना शामिल हैं।

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