किंगदाओ । भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) को एक सुरक्षित एवं आपस में जुड़े हुए संगठन बनाने के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जताते हुए आज कहा कि पड़ोसियों के साथ कनेक्टिविटी भारत की प्राथमिकता है लेकिन वह ऐसी नयी कनेक्टविटी परियोजनाओं का स्वागत करता है जो समावेशी, सतत और पारदर्शी होने के साथ ही देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एससीओ के विस्तारित पूर्ण सत्र में अपने हस्तक्षेप में कहा कि सुरक्षा यानि सिक्यूरिटी हमारी प्रमुख प्राथमिकता है। समग्र रूप से हमारे क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए छह महत्वपूर्ण आयाम हैं। इनका संक्षिप्त रूप अंग्रेजी का शब्द सिक्योर होता है जिसका अभिप्राय एस से हमारे नागरिकों के लिए सुरक्षा, ई से सबका आर्थिक विकास, सी से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, यू से हमारे नागरिकों में एकता, आर से संप्रभुता एवं अखंडता के प्रति सम्मान और ई से पर्यावरण सुरक्षा से है।

उन्होंने कहा, “मैं मानता हूँ कि इन दिशाओं में सार्थक सहयोग से ही हमारा एससीओ सही मायनो में सेफ एंड कनेक्टेड आर्गेनाइजेशन (सुरक्षित एवं एकदूसरे से जुड़ा हुआ संगठन) बन सकेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि आज हम फिर एक ऐसे मुकाम पर हैं जहां भौतिक और डिजीटल कनेक्टिविटी भूगोल की परिभाषा बदल रही हैं। एससीओ क्षेत्र में और हमारे पड़ोसियों के साथ कनेक्टिविटी भारत की प्राथमिकता है। हम ऐसे नए कनेक्टिविटी परियोजनाओं का स्वागत करते हैं जो समावेशी, सतत और पारदर्शी हों, और जो देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें।

श्री मोदी की इस टिप्पणी को ‘बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव’ के तहत चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के विरोध के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी के लिए हमारी प्रतिबद्धता अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे, चाबहार बंदरगाह का विकास और अश्गाबात समझौता जैसे विशिष्ट प्रोजेक्ट्स में हमारी सक्रिय सहभागिता में दिखाई देती है।

कोई जवाब दें