जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश में अप्रत्यक्ष करदाता पंजीयन में 41.24 प्रतिशत की वृद्धि
जीएसटी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिये प्रदेशभर में 100 हैल्प डेस्क स्थापित
वाणिज्यिक कर विभाग की 16 हजार 419 करोड़ रुपये अधिक की अनुदान माँगे पारित
समीक्ष आलेख : सरमन नगेले
मध्यप्रदेश विधानसभा में वर्ष 2018-19 की अनुदान माँगों पर चर्चा शुरू। सामान्य प्रशासन विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, विमानन और आनंद विभाग की वर्ष 2018-19 की और वाणिज्यिक कर विभाग अनुदान माँगे सदन में पारित आनंद विभाग की वर्ष 2018-19 की और वाणिज्यिक कर विभाग अनुदान माँगे सदन में पारित। आज विधानसभा में भोजन अवकाश नहीं हुआ। सदन की कार्यवाही निर्धारित समय से अधिक तब तक चलेगी, जब तक सभी विभागों की अनुदानों की मांगें पारित नहीं हो जातीं। साथ ही भोजन अवकाश भी नहीं होगा।

विधानसभा के बजट सत्र की कार्रवाई अन्य दिनों की अपेक्षा शांतिपूर्ण ढंग से चली। सदन में आज अन्य दिनों की अपेक्ष्रा शोरगुल थोड़ा कम हुआ।

मध्यप्रदेश विधानसभा मंगलवार 13 मार्च, 2018 को जैसे ही समवेत हुई अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने प्रश्नोत्तर काल में सबसे पहले सदस्य जतिन उइके का नाम पुकारा उन्होंने अपने सवाल से सम्बंधित पूरक प्रश्न भी किये । इसके बाद श्री नीलेश अवस्थी सदस्य कांग्रेस ने प्रश्नोत्तर काल में वाणिज्यिक कर मंत्री से देशी शराब से संबंधित शराब दुकान हटाने संबंधी प्रश्न किया। इस प्रश्न के उत्तर के बाद मुख्य प्रतिपक्ष दल कांग्रेस के मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह ने टिप्पणी की थी कि यह सरकार शराबबंदी के खिलाफ है। प्रश्नकाल में अनेक सदस्यों ने अपने-अपने पूरक प्रश्न किये जिसका संबंधित मंत्रियों ने समाधानकारक उत्तर दिया। सदन में आज प्रश्नोत्तर काल 15 प्रश्नों तक चला। शून्य काल के दौरान स्व-सहायता समूहों द्वारा दलिया बनाने की मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा पर नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति जताई। नेता प्रतिपक्ष ने बोरवेल के मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइड-लाइन का पालन हो, इस विषय को भी सदन में उठाया। नेता प्रतिपक्ष ने सदन में शून्य काल के दौरान और भी मामले उठाये।

इसके बाद स्पीकर ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई। सदन में आज अनेक सदस्यों की शून्य काल की सूचनाएँ पढ़ी हुई मानी गईं। शून्य काल समाप्त होने के बाद श्री गोपाल भार्गव, सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण मंत्री ने नि:शक्त व्यक्ति, समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी से संबंधित वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016-17 और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम की वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 को पटल पर रखा। इसके बाद डॉक्टर गौरीशंकर शेजवार, वन मंत्री ने कम्पनी अधिनियम की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड का 42वाँ वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2016-17 पटल पर रखे। इसी कड़ी में श्री गौरीशंकर बिसेन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री ने अपने विभाग से संबंधित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय की वैधानिक ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2015-16 को पटल पर रखा।

इसके बाद स्पीकर डॉ. सीतासरन शर्मा ने सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए ध्यानाकर्षण पर चर्चा प्रारंभ कराई। पहली ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से भाजपा सदस्य श्री हेमंत विजय खण्डेलवाल ने प्रदेश में व्यावसायिक पट्टों के नवीनीकरण की दर में वृद्धि किये जाने से उत्पन्न स्थिति की ओर राजस्व मंत्री का ध्यान आकर्षित किया, जिसका उत्तर देते हुए राजस्व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि स्थायी पट्टों के नवीनीकरण तथा अस्थायी पट्टों की शर्त उल्लंघन व अपालन के मामलों के निराकरण के संबंध में सरकार ने 4 मई, 2002 और समय-समय पर इस संबंध में जारी निर्देशों को अधिक्रमित करते हुए स्थायी पट्टों के नवीनीकरण एवं 11 जुलाई, 2014 को निर्देश जारी किये थे, जो अस्तित्व में हैं। शासन स्तर पर विभिन्न ज्ञापनों के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई है कि इस परिपत्र में विसंगति के कारण नजूल भूमि के पट्टे के नवीनीकरण की कार्यवाही नहीं हो पा रही है। इस संबंध में राजस्व मंत्री ने सदन को बताया कि इस विषय पर शासन गंभीर है और 11 जुलाई, 2014 के परिपत्र से संबंधित विसंगति पर विचार किया जा रहा है। शीघ्र ही निर्णय लिया जायेगा।

दूसरी ध्यानाकर्षण सूचना के जरिये कांग्रेस सदस्य, श्रीमती झूमा सोलंकी ने प्रदेश में कृषि यंत्रों पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिये ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया दोषपूर्ण होने की ओर किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री के विभाग से संबंधित मामला उठाया, जिसका उत्तर देते हुए किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा कि पोर्टल को चालू करने की कृषकों को पूर्व में सूचना प्राप्त नहीं होती थी। शासन द्वारा विभाग की अनुदान योजनाओं का लाभ डीबीटी के आधार पर दिये जाने के लिये ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल 27 जून, 2017 सो प्रारंभ किया गया है। नई ऑनलाइन व्यवस्था पारदर्शी है, जिसमें किसानों को समस्त जानकारियाँ और कितना अनुदान प्राप्त होगा, पोर्टल पर हमेशा उपलब्घ रहता है। ऑनलाइन पोर्टल किये जाने से किसानों को किसानों से संबंधित योजना का लाभ प्राप्त करने के लिये किसी भी शासकीय कार्यालय में आना नहीं पड़ता है और वे कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत कर सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही अनुदान राशि अपने बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। कृषकों के आवेदन को आधार से जोड़ा गया है। इसलिये फर्जी प्रकरणों की संभावना समाप्त हो गई है। किसान अपने द्वारा आवेदन की वर्तमान स्थिति किसी भी समय पोर्टल पर देख सकता है। केवल लक्ष्यों को बढ़ाने और पोर्टल मेंटेनेंस के आवश्यक समय के लिये बंद किया जाता है। कृषि मंत्री ने बताया कि ऑनलाइन पोर्टल की इस पारदर्शी व्यवस्था से कृषकों में कोई आक्रोश व्याप्त नहीं है।

सदन में इसके बाद सदस्यगण श्री लखन पटेल, श्री हर्ष यादव, श्री शैलेन्द्र पटेल, श्री रमाकांत तिवारी, श्री प्रदीप लारिया, श्री गोविंद सिंह पटेल समेत 41 सदस्यों की याचिकाएँ सदन में प्रस्तुत हुई मानी गयीं।

स्पीकर डॉ. सीतासरन शर्मा सदन की कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए राज्य मंत्री श्री लाल सिंह आर्य से अपने विभागों की माँगे सदन में प्रस्तुत करने को कहा। मध्यप्रदेश विधानसभा में आज बजट पर अनुदानों की माँगों पर मतदान के समय सामान्य प्रशासन विभाग, विमानन और आनंद विभाग की वर्ष 2018-19 की अनुदान माँगें प्रस्तुत कीं। स्पीकर डॉ. सीतासरन शर्मा ने कांग्रेस सदस्य श्री कमलेश्वर पटेल का नाम पुकारा कि अनुदानों की माँगों पर अपनी बात रखें। उन्होंने अनुदान की मांगों पर चर्चा की शुरूआत की। इसके बाद भाजपा सदस्य श्री यशपाल सिंह सिसोदिया, कांग्रेस सदस्य श्री रामनिवास रावत, भाजपा सदस्य श्री शंकरलाल तिवारी, कांग्रेस सदस्य सुश्री हिना लिखीराम कांवरे, कांग्रेस सदस्य श्री यादवेन्द्र सिंह, भाजपा सदस्य श्री हेमंत खण्डेलवाल, कांग्रेस सदस्य श्री गोविंद सिंह और भाजपा सदस्य श्री बहादुर सिंह चौहान समेत अनेक सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया। सामान्य प्रशासन और विमानन राज्य मंत्री श्री लाल सिंह आर्य ने अपने विभागों की अनुदान मांगों पर सदस्यों द्वारा जो विषय उठाये गये, उनका सिलसिलेवार उत्तर दिया। मंत्री श्री आर्य ने अपने उत्तर में सदन को बताया कि मध्यप्रदेश में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिये अनेक प्रयास किये गये हैं। उन्हें सम्मान-निधि भी दी जाती है। मंत्री श्री आर्य ने सदन को बताया कि भोपाल और इंदौर में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुविधा और यहाँ से मुस्लिम वर्गों के लिये विभिन्न जत्थों को रवाना करने की सुविधा को बढ़ाने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। आनंद विभाग द्वारा आनंद कैलेण्डर बनाया गया है। इससे लोगों के जीवन में सकारात्मक सोच का संचार हो रहा है। आनंद विभाग आनंद की परिकल्पना की दिशा में अनेक सकारात्मक कदम उठा रहा है। मंत्री श्री आर्य ने सदन को बताया कि मध्यप्रदेश सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिये न केवल प्रतिबद्ध है, बल्कि अनेक कदम भी प्रभावी ढंग से उठा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अनुसूचित-जाति, अनुसूचित-जनजाति, घुमक्कड़, अर्द्ध-घुमक्कड़ और पिछड़ा वर्ग के लोगों के एक करोड़ 26 लाख से अधिक जाति प्रमाण-पत्र बनवाकर दिये गये हैं, जो डिजिटल जाति प्रमाण-पत्र हैं।

इसके बाद मंत्री श्री आर्य के जवाब के बाद उनके विभागों से संबंधित 634 करोड़ 97 लाख रुपये से अधिक की अनुदान मांगें सदन में पारित की गईं।

सदन में इसके बाद वित्त और वाणिज्यिक कर विभाग से संबंधित वर्ष 2018-19 की अनुदान की मांगों पर चर्चा हुई।

मध्यप्रदेश के वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री श्री जयंत मलैया ने सदन में कहा है कि पेट्रोल और डीजल पर लगाया गया उपकर (सेस) का उपयोग प्रदेश की सड़कों के निर्माण पर खर्च किया जायेगा। सेस से राज्य सरकार को केवल 250 करोड़ रुपये की आय होगी। उन्होंने कहा कि देश में 8 से 10 राज्य ऐसे हैं, जहाँ पर पेट्रोल-डीजल का प्रति लीटर रेट मध्यप्रदेश से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व में ही पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले करों में कमी की है।

वाणिज्यिक कर मंत्री श्री मलैया ने कहा कि शराब की दुकानों को एक साथ बंद कर प्रदेश में शराबबंदी को सफल नहीं बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से हम शराबबंदी के उद्देश्य को पा सकते हैं। वाणिज्यिक कर की अनुदान माँगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री श्री मलैया ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2016-17 के पहले त्रैमास में कर राजस्व 5441 करोड़ की तुलना में वित्तीय वर्ष 2017-18 के पहले त्रैमास में वाणिज्यिक कर विभाग की क्षमता में वृद्धि हुई है। अप्रैल-2017 से जून-2017 तक विभाग को 6226 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो पूर्व वर्ष की अवधि की तुलना में 14.42 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में लगातार राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि हो रही है।

मध्यप्रदेश में एक जुलाई, 2017 से सभी प्रकार के अप्रत्यक्ष करों को समाहित करते हुए जीएसटी को लागू किया गया है। जीएसटी के पूर्व पंजीयत व्यवसाइयों के जीएसटी में माइग्रेशन के मामले में मध्यप्रदेश सभी राज्यों में सर्वाधिक 92 प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर सका है। जीएसटी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिये प्रदेशभर में 100 हेल्प डेस्क स्थापित की गई हैं। जीएसटी लागू होने के बाद 2 लाख 66 हजार 746 व्यवसाइयों को जीएसटी में माइग्रेशन कराया गया है। इसके अलावा जीएसटी में एक लाख 10 हजार नये व्यवसाइयों का पंजीयन हुआ है। अप्रत्यक्ष करदाता पंजीयन में 41.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। व्यवसाइयों को सुविधा प्रदान करने के मकसद से कम्पोजिशन व्यवसाइयों के लिये टर्न-ओवर की सीमा 50 लाख रुपये से बढ़ाई गई है। विवरण-पत्र देरी से भरने वाले व्यवसाइयों पर लगने वाली फीस एवं पेनाल्टी को माफ किया गया है। वाणिज्यिक कर मंत्री ने बताया कि जीएसटी अधिनियम में कर की देयता माल एवं सेवाओं की आपूर्ति 20 लाख रुपये वार्षिक से अधिक होने पर आती है, जबकि वैट अधिनियम में यह वार्षिक सीमा 10 लाख रुपये थी। उन्होंने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद वन विकास उपकर भी समाप्त करने का निर्णय राज्य शासन ने लिया है। वनोपज बिक्री पर प्रदेश के अंदर 3 प्रतिशत और प्रदेश के बाहर 5 प्रतिशत वन विकास उपकर को समाप्त कर दिया गया है।

वाणिज्यिक कर मंत्री श्री मलैया ने सदन को बताया कि प्रमुख नगरों में भूमि के अधिकतम उपयोग के लिये बहु-मंजिला व्यावसायिक कॉम्पलेक्स को प्रोत्साहित करने के लिये इस वर्ष स्टॉम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क के मार्गदर्शी सिद्धांतों में परिवर्तन किया जा रहा है। श्री मलैया ने सदन को बताया कि लगने वाले वृत्ति कर की आय सीमा को बढ़ाया गया है। बीस लाख रुपये से कम टर्न-ओवर वाले माल एवं सेवाओं की आपूर्ति को वृत्ति कर से मुक्त किया जा रहा है। आबकारी विभाग की चर्चा करते हुए वाणिज्यिक कर मंत्री ने बताया कि वर्ष 2018-19 में गर्ल्स स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल्स और धार्मिक स्थलों से 50 मीटर तक की दूरी की 149 देशी-विदेशी मदिरा दुकानों को एक अप्रैल, 2018 से बंद कर दिया जायेगा। वर्ष 2017-18 में नर्मदा किनारे के शहरों में 5 किलोमीटर तक की दूरी की 66 मदिरा दुकानों को बंद किया गया है। प्रदेश में 50 लीटर से अधिक अवैध शराब के परिवहन को गैर-जमानती अपराध बनाया गया है। मध्यप्रदेश में आबकारी मद से 8 हजार करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त होता है, जो कल्याणकारी कार्यों पर खर्च किया जाता है।

पंजीयन विभाग की गतिविधियों की जानकारी देते हुए वाणिज्यिक कर मंत्री श्री मलैया ने बताया कि विभाग की सभी गतिविधियों को एक अगस्त, 2015 से कम्यूटरीकृत किया जा चुका है। सम्पदा पोर्टल के माध्यम से वर्ष 2017-18 में अप्रैल-2017 से 10 मार्च, 2018 तक 7 लाख 3 हजार 500 दस्तावेज ई-पंजीकृत किये गये हैं। सेवा प्रदाताओं द्वारा 22 लाख 61 हजार 334 ई-स्टॉम्प जनरेट किये गये हैं। इस वर्ष पंजीयन से 11 महीनों में 4 हजार 257 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 23.88 प्रतिशत अधिक है।
वाणिज्यिक कर मंत्री श्री जयंत मलैया की अनुदान माँगों पर चर्चा के बाद उनके विभाग का बजट 16 हजार 419 करोड़ 82 लाख 40 हजार रुपये की अनुदान माँगों को सर्व-सम्मति से पारित कर दिया गया। इसके पश्चात पंचायत एवं ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय विभाग की मांगों पर चर्चा शुरू हुई। स्पीकर सीता सरन शर्मा ने विधानसभा की कार्यवाही 14 मार्च 2018 तक के लिया स्थगित की।

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