भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से आज यहां मंत्रालय में इंटरनेशनल सोलर अलायंस के प्रतिनिधि मंडल ने भेंट की। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मंडल को बताया कि सौर ऊर्जा का दोहन करने में अग्रणी है मध्यप्रदेश।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। यहां सूर्य प्रकाश 360 दिन उपलब्ध रहता है। श्री चौहान ने कहा कि सौर ऊर्जा के दोहन के लिए उत्कृष्ट परियोजनाएं स्थापित करने में भी देश का अग्रणी राज्य है मध्यप्रदेश। उन्होंने बताया कि रीवा में विश्व की सबसे बड़ी 750 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित की गई है। इसी प्रकार, नीमच में 135 मेगावाट की परियोजना स्थापित की गई है जो एशिया में सबसे बड़ी परियोजना है। मंदसौर में भी 250 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने की तैयारी है।

श्री चौहान ने प्रतिनिधि मंडल को बताया कि सौर ऊर्जा के उपयोग को किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए मुख्यमंत्री सौर ऊर्जा पंप योजना बनाई गई है। इसमें किसानों को अनुदान पर सौर ऊर्जा चलित पंप उपलब्ध कराए कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने सबसे कम लागत की सौर ऊर्जा उत्पादन दर हासिल करने में सफलता प्राप्त की है। जब विश्व में सौर ऊर्जा उत्पादन दर 4 रुपये से ज्यादा थी, तब मध्यप्रदेश ने 2 रुपये 97 पैसे की सबसे सस्ती दर पर सौर ऊर्जा उत्पादन करने में सफलता प्राप्त की है। मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा को भविष्य की ऊर्जा बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए टास्क फोर्स बनाई गई है। खाना बनाने के लिए सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस अवसर पर नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा विकास निगम के अध्यक्ष श्री विजेन्द्र सिंह सिसोदिया, प्रमुख सचिव नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव और इंटरनेशनल सोलर अलायंस के पदाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री से भेंट के पूर्व प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने मालवा अंचल में सौर ऊर्जा के उपयोग का अध्ययन किया। उन्होंने सोलर ऊर्जा पंप के उपयोग को देखा और उनका उपयोग कर रहे किसानों से बातचीत भी की।

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