नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार (1 दिसंबर) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की. इस साल जनवरी में व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात है. मोदी ने ट्वीट किया, ‘पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से एक बार फिर मुलाकात प्रसन्नता की बात है. उनके नेतृत्व में ओबामा फाउंडेशन के तहत शुरू की गई नयी पहल के बारे में जानकारी मिली और भारत अमेरिकी सामरिक गठजोड़ को और मजबूत बनाने पर उनकी सोच से अवगत हुआ.’ उल्लेखनीय है कि ओबामा गुरुवार (30 नवंबर) को दिल्ली आए हैं और उन्होंने यहां एक मीडिया संगठन की ओर से आयोजित शिखर सम्मेलन को संबोधित किया. ओबामा पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे जो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बने. अपने कार्यकाल के दौरान भारत की दो बार यात्रा करने वाले ओबामा पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे.

इससे पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार (1 दिसंबर) को कहा कि अमेरिका के पास ऐसे कोई सबूत नहीं हैं, जिससे यह साबित होता हो कि इस्लामाबाद को अमेरिकी आतंकी हमले के साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में होने के बारे में कोई जानकारी थी. उन्होंने यहां ‘एचटी लीडरशिप समिट’ में कहा कि जब नवंबर 2008 में मुंबई में आतंकी हमला हुआ, आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए अमेरिका भी भारत जितना ही बेचैन था. और भारत सरकार की मदद के लिए अमेरिकी खुफिया विभाग के जवानों की तैनाती की गई.

पाकिस्तान से पैदा आतंक के बारे में पूछे जाने पर, ओबामा ने कहा कि परेशानी का कारण यह नजरिया है कि पाकिस्तान के कुछ खास आतंकवादी संगठन और पाकिस्तान के अंदर विभिन्न सरकारी संस्थाओं से जुड़े तत्वों के बीच संबंध हैं.यह पूछे जाने पर कि क्या पाकिस्तान सरकार को ऐबटाबाद में ओसामा के छिपने की जानकारी थी, ओबामा ने कहा, ‘हमारे पास ऐसे कोई सबूत नहीं हैं जिससे इस बात की पुष्टि होती हो कि पाकिस्तान सरकार को ओसामा बिन लादेन के वहां होने के बारे में कोई जानकारी थी, लेकिन इस पर हमने जाहिर तौर पर गौर किया. जो मैंने कहा, उसके आगे गौर करने के लिए इसे मैं आपके ऊपर छोड़ता हूं.’

यह पूछे जाने पर कि क्या वह भारत और अमेरिका की परमाणु ऊर्जा कंपनियों जीई और वेस्टिंगहाउस के बीच भारत में परमाणु रियेक्टर बनाने की दिशा में कम प्रगति पर निराश हैं, उन्होंने कहा कि उनकी भूमिका अमेरिकी कंपनियों को अवसर मुहैया कराना था. ओबामा ने कहा कि अमेरिका ने भारत को 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में जगह दिलाने के लिए ‘बहुत मेहनत’ की.

उन्होंने किसी देश का नाम लिये बिना कहा, ‘हमें हर देश से सहयोग नहीं मिला.’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह इसके लिए चीन को जिम्मेदार ठहराते हैं, ओबामा ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय मामलों में, किसी खास देश की मंशा में भेद करना मुश्किल है. मैं स्पष्ट रूप से यह कहने का खतरा मोल नहीं लूंगा कि चीन की आपत्तियां उसकी प्रतिस्पर्धा के नजरिये पर आधारित है.’

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