नई दिल्ली: बाल्टिक क्षेत्र में अपनी पैठ और पहुंच मजबूत बनाने की पहल के तहत भारत ने सोमवार (9 अक्टूबर) को लिथुआनिया के साथ वायु सेवा से जुड़े समझौते को सुदृढ़ बनाने और प्रत्यर्पण संधि एवं प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किया. पिछले सप्ताह ही प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भारत और लिथुआनिया के बीच प्रत्‍यर्पण संधि पर हस्‍ताक्षर और इसकी पुष्टि को अपनी मंजूरी प्रदान की गई थी. इस समझौते पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और भारत की यात्रा पर आये लिथुआनिया के विदेश मंत्री लिनास लिंकेविसियस ने हस्ताक्षर किया.

लिथुआनिया के विदेश मंत्री लिंकेविसियस रविवार (8 अक्टूबर) को तीन दिवसीय यात्रा पर नयी दिल्ली पहुंचे. लिंकेविसियस ने आज भारत-लिथुआनिया गोलमेज चर्चा में हिस्सा लिया. वे मंगलवार (10 अक्टूबर) को मुम्बई में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जायेंगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया, ‘‘भारत और लिथुआनिया ने प्रत्यर्पण एवं प्रोटोकाल संधि पर हस्ताक्षर किया तथा बाल्टिक क्षेत्र के साथ सम्पर्क को सुदृढ़ बनाने के लिये वायु सेवा को मजबूत बनाने संबंधी समझौता किया.’’ उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लिथुआनिया के विदेश मंत्री लिनास लिंकेविसियस का नयी दिल्ली में स्वागत किया.

लिंकेविसियस अगले वर्ष विलमस में सुषमा स्वराज का स्वागत करेंगे. उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि में आतंकवादियों, आर्थिक अपराधियों और अन्‍य अपराधियों के लिथुआनिया से भारत और भारत से लिथुआनिया को प्रत्‍यर्पण किए जाने हेतु कानूनी ढांचा उपलब्‍ध होने की बात कही गई है.

इस संधि से लिथुआनिया से आतंकवादियों सहित भगोड़े अपराधियों के आपराधिक अभियोजन हेतु प्रत्‍यारोपण में मदद मिलेगी, जो भारत के खिलाफ आपराधिक गतिविधियां कर चुके हैं. इससे बड़े पैमाने पर लोगों में शांति एवं सामंजस्‍य सुनिश्चित करने की दृष्टि से अपराधियों को न्याय के कटघरे में खड़ा जा सकेगा.

लिथुआनिया के साथ भारत के संबंध काफी घनिष्ठ और मधुर हैं जो मजबूत सांस्कृतिक रिश्तों पर आधारित हैं. यूएसएसआर से अलग होने के बाद भारत से तत्काल उसे मान्यता मिली थी. लिथुआनिया और भारत के राजनयिक संबंध 25 फरवरी 1992 को स्थापित हुए थे. लिथुआनिया ने जुलाई 2008 में नयी दिल्ली में अपना दूतावास खोला था. भारत और लिथुआनिया के बीच पहला राजनीतिक सम्पर्क जून 1992 में उस समय स्थापित हुआ था जब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन में हिस्से लेने के दौरान लिथुआनिया के पहले राष्ट्रपति व्यतौतस लैंड्सबर्गीज से मिले थे.

भारत और लिथुआनिया के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं. भारत की ओर से लिथुआनिया को जिन वस्तुओं का निर्यात किया जाता है उनमें मुख्य रूप से सब्जियों से जुड़े उत्पाद, मछली, मांस, फुटवियर, काफी, चाय, लौह मिस्र धातु, दरी, चावल आदि शामिल है. लिथुआनिया की ओर से भारत को निर्यात की जाने वाली वस्तुओं में खनिज, रासायनिक उर्वरक, पोटास, कपड़ा से जुड़ी सामग्री, लेबोरेटरी रीजेंट आदि शामिल है. लिथुआनिया में छात्रों सहित भारतीय समुदाय के लोग वहां रहते हैं.

कोई जवाब दें